फतेहगढ़ की 300 साल पुरानी कच्ची जेल में बंद हैं 2200 कुख्यात अपराधी

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फर्रुखाबाद (वेबवार्ता)। अंग्रेजी हुकूमत में कच्ची ईंट से बनाई गई केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ की अधिकांश बैरकें जर्जर हो गईं हैं जिनमें माफिया और कुख्यात अपराधी बंद हैं। कच्ची बैरकें और लोटा को लेकर जेल प्रशासन की नींद उड़ी हुई हैं। सेंट्रल जेल फतेहगढ़ का निर्माण अंग्रेजों ने वर्ष 1868 में कच्ची ईंट और मिट्टी से जोड़कर कराया था। तब से अब तक इस जेल की केवल 6 बैरकों को पक्का कराया गया है। शेष बैरकों की हालत खस्ता है। इस समय जेल में पूर्वांचल का माफिया सुभाष सिंह और छोटा शकील के गुर्गे बंद हैं। मुन्ना बजरंगी के हत्यारोपित सुनील राठी को भी सुरक्षा की दृष्टि से भेजा जा चुका है। बैरक सं या 164 में बन्दी गौरी शंकर की मौत के बाद कच्ची बैरकों में रह रहे बंदियों की सुरक्षा में अब छेद ही छेद नजर आने लगे हैं। हत्या, अपहरण जैसे संगीन अपराधों के अंजाम में यहां आजीवन सजा भुगत रहे तकरीबन 2200 आजीवन कारावासी बंदियों की सुरक्षा करने में जेल प्रशासन को लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं।

सबसे खास बात यह है कि अधिकांश इमारतों को 100 साल के बाद इंजीनियर कण्डम कर देते हैं लेकिन फतेहगढ़ सेंट्रल जेल की बैरकों को लगभग 300 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक कण्डम नहीं किया गया है। जेल की बैरकें कच्ची की वजह से यहां किसी तरह की अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी कच्ची बैरिक का फायदा उठाकर बन्दी चंद्रहास ने पड़ोसी बन्दी की हत्या कर दी। जब इस सबन्ध में जेलर प्रमोद कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कच्ची बैरकों को पक्का करने का प्रस्ताव भेजा गया है। अति शीघ्र पूरी जेल पक्की हो जायेगी।

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