फेफड़ों को डैमेज कर सकता है घर के अंदर का वायु प्रदूषण

indoor air pollution

नई दिल्ली (वेबवार्ता)। घर के अंदर का वायु प्रदूषण फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीड़ित पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।

वेंकटेश्वर हॉस्पिटल के रेस्पेरेट्री विभाग के अध्यक्ष डॉ. (ब्रिगेडीयर) अशोक के राजपूत के अनुसार सीओपीडी के कुछ सामान्य संकेतों और लक्षणों में सामान्य खांसी या बलगम वाली खांसी, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय, सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आदि शामिल हैं। “क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के लिए सबसे प्रभावी और निवारक थेरेपी है तम्बाकू के धुएं से बचाव। दवा में ब्रोंकोडाइलेटर्स शामिल हैं, जो एयर पाइप के चारों ओर की मांसपेशियों को आराम देते हैं। ये वायुमार्ग को खोलने के साथ-साथ सांस लेने में आसानी पैदा करते हैं। डॉ राजपूत के अनुसार सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय होता है।” फेफड़ों की पुरानी अवरोधक बीमारी से पीड़ित हैं, और देश में मृत्यु दर के पांच प्रमुख कारणों में से तीन गैर-संक्रमणीय बीमारियां हैं और सीओपीडी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। सीओपीडी, जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है।

डॉ. राजपूत के अनुसार, स्वस्थ फेफड़ों के लिए मछली और नट जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड से समृद्ध आहार लेना चाहिए। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बचें, क्योंकि यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और इसे संक्रमण और बीमारियों से घेर सकता है। सुनिश्चित करें कि आप अक्सर अपने फर्नीचर से धूल हटाते रहें और अपने घर को धूम्रपान और वायु प्रदूषण मुक्त क्षेत्र बनाएं।

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